baccho ki hindi kahaniyan | स्वार्थी दानव की कहानी 


bachon ki kahaniyan in hindi
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हैलो दोस्तों हमारे ब्लॉग में आपका स्वागत है। हमारे ब्लॉग पर इसी तरह की अच्छी जानकारी दी जाएगी। दोस्तों इस आर्टिकल में जानेंगे ! bachhon ki kahani  के बारे में| बच्चे और स्वार्थी दानव के बारे में मजेदार कहानी ?

bachon ki kahaniyan in hindi - बच्चों की कहानी हिन्दी में 

हर रोज जब बच्चे स्कूल से लौटते तो वे एक बाग में जाकर खेला करते थे ! हरी भरी घास से भरा एक विशाल सुंदर बाग था ! जहां-तहां घास के ऊपर तारों की तरह सुंदर फूल खिलेे थे ! 

पेड़ में फल से लदे रहते थे ! पेड़ों पर बैठी पंंछी नेेेे मधुर स्वर में गाते कि बच्चे खेलना छोड़ कर उनका संगीत सुनने लगते ! बच्चे बहुत खुश से बाग में खेलते थे ! लेकिन यह बाग एक दानव का था !

एक दिन दानव लौटकर आया | वह दानव अपने दोस्तों से मिलने गया था ! जब वह लौटा तो उसने देखा कि बच्चे बाग में खेल रहे हैं | 

दानव ने कहा  - मेरा बाग!  मैं अपने सिवा किसी और को इसमें खेलने नहीं दूंगा | सारे बच्चे दानव के भाग गया |  बेचारे बच्चों को खेलने के लिए अब कोई जगह नहीं रहा | 
बच्चों ने कहा - हम लोग वहां कितने खुश हैं | वह एक दूसरे से कहते हैं | 

स्वार्थी दानव के बाग में भी जाड़ा का समय था ! बर्फ ने अपनी लंबी उजली चादर से बगीचे को ढक दिया और तुषार ने सभी पेड़ों को उजले रंग से रंग दिया |

तब ओला पड़ना शुरूआत हुआ ! हर रोज व छत की महल पर दौड़ता उसने सारे कपड़े तोड़ डाले इस तरह वह भाग में दौड़ लगाता रहता | उसका रंग धूसर था और उसकी सांसें बर्फ जैसी थी |

दानव कहता -  समझ में नहीं आता बसंत आने में विलंब क्यों कर रहा है ? खिड़की के पास बैठा बाहर ठंडे उजले बाग पर नजर दौड़ते हुए |
स्वार्थी दानव ने कहा - मुझे उम्मीद है कि मौसम बदलेगा !

लेकिन बसंत नहीं आया और न गर्मी आई | शरद ऋतु में हर बाग में सुनहरे फल लगे ! लेकिन दानव के बाग में कोई फल नहीं लगा | वह हमेशा जाड़ा रहता और उत्तरी हवा , ओले और तुषार पेड़ों के आस-पास मंडराते रहते |

  एक सुबह , जब दानव अपने बिस्तर पर पड़ा था | उसने एक गुनगुनाहट सुना और अचानक बिस्तर पर उठा ! उसने खिड़की से झांका ! उसने एक अद्भुत दृश्य देखा  दीवार से एक छोटे छेद से बच्चे भीतर घुस आए थे और वे पेड़ों की डालियों पर बैठे थे | baccho ki hindi kahaniya

 हर पेड़ पर एक बच्चा बैठा था  पेड़ बच्चों को अपने बीच पाकर इतने खुश थे कि वह कलियों से लग गए थे और बच्चों का सिर पर अपनी बांहों को धीरे-धीरे हिला रहे थे |चिड़िया उड़ रही थी और खुशी से गा रही थी |फुल हर घास से निकलकर मुस्कुरा रहे थे |

 वह बहुत मनोरम दृश्य था | लेकिन बाग के एक कौने में अभी जाड़ा था |वह बाग का सबसे दूर वाला हिस्सा था | वहां एक छोटा लड़का खड़ा था | वह इतना छोटा था कि वह पेड़ की टहनियों को छू नहीं पा रहा था |

 वह फूट-फूट कर रोता हुआ चारों ओर घूम रहा था | बेचारा पेड़ अभी भी बर्फ और तुषार से ढका था | उत्तरी हवा उसके ऊपर गरज रही थी | चढ़ो , छोटे बच्चे पेड़ ने कहा और उसने अपनी डालियों को नीचे झुका लिया |लेकिन बच्चा बहुत छोटा था |

दानव ने जब यह देखा कि उसका दिल पिघल गया | मैं कितना मूर्ख हूं ? उसने कहा ! अब मुझे पता चला बसंत क्यों नहीं आ रहा था | मैं उस छोटे बच्चे को पेड़ के ऊपर चढ़ा दूंगा | मैं दीवार को गिरा दूंगा | मेरा बगीचा हमेशा के लिए बच्चों का खेलने का जगह बन जाएगा | वह सचमुच अपने किए पर बहुत पछता रहा था |


दानव नीचे उतरा और धीरे से अगला दरवाजा खोलकर बगीचें के अंदर गया | जब बच्चों ने उसे देखा तो वह इतने भयभीत हो गए कि वे सब भाग गए | बाग में जाड़ा फिर लौट आया !

सिर्फ छोटा बच्चा नहीं भागा , क्योंकि उसकी आंखों में आंसुओं से इस तरह भरी थीं कि वह दानव को आते हुए नहीं देख पाया  दानव दबे पांव उसके पीछे गया और उसे धीरे से अपने हाथ से उठाकर पेड़ के ऊपर चढ़ा दिया |

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bachon ki kahaniyan in hindi - बच्चों की कहानी हिन्दी में 

पेड़ तुरंत खिल उठा और चिड़िया आकर गाने लगीं | वह छोटा बच्चा अपनी दोनों बांहों को फैलाकर दानव के गले से लिपट गया और चूम लिया |

 जब दूसरे बच्चे ने देखा कि दानव अब कठोर नहीं रहा तब वे दौड़ते हुए लौट आएं |
दानव ने कहा - यह बाग अब तुम्हारा है ! उसने एक बड़ा हथोड़ा लिया और दीवार को तोड़ डाला | अब दिन भर बच्चे खेलते रहते | शाम को दानव के पास जाकर उसे good by कहते |

दानव ने कहा - लेकिन तुम्हारा छोटा साथी कहां हैं ? जिसको मैंने पेड़ पर चढ़ाया था ? मैं उसे सबसे अधिक प्यार करता हूँ |क्योंकि उसने से चूमा था |
बच्चे ने कहा - हमें पता नहीं , वह कहीं दूर चला गया है |

हर रोज अपराहन में जब स्कूल बंद होता , बच्चे आते और दानव के साथ खेला करते थे | लेकिन वह छोटा लड़का जिसे दानव बहुत चाहता था |अब कभी बाग में खेलने  नहीं आता था | दानव सभी बच्चों को बहुत प्यार करता था | फिर भी वह छोटे बच्चे के लिए तरसता रहता था |

बर्षो बीत गये | दानव बहुत बुढ़ा और कमजोर हो गया ! वह खेलकूद नहीं कर सकता था | इसलिए वह एक बड़ी आराम कुर्सी पर बैठा रहता ! खेलते के बच्चों को देखा करता और अपने पास बगीचें की प्रशंसा करता |
दानव कहा - मेरे पास बहुत से सुंदर फूल है | लेकिन बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं |

दानव एक दिन जाड़े की शाम को जब वह कपड़े पहन रहा था | उसने खिड़की से बाहर देखा , बगीचे के अंतिम कोने में एक पेड़ के नीचे वही छोटा बच्चा खड़ा था | जिसे वह बहुत प्यार करता था |

दानव आनंद से दानव दौड़ता हुआ बगीचें में गया | वह घास को पार कर उस बालक के पास गया | लेकिन जब वह उसके बिल्कुल करीब पहुंचा तो वह देख कर चौंक गया | वह उसे गले से लगा लिया और दानव बोला तुम कहां थे|

अब तुम इस बगीचें में खेलते रहना | अब ये बाग तुम्हारा है! अब हर दिन सारे बच्चे और छोटे बच्चे बाग में खेलने आने लगे |जब एक दिन सारे बच्चे खेलने पहुंचा तो उस दानव को पेड़ के नीचे मरा पाया |
                              ( समाप्त )

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