moral stories in hindi short| इंसान और भूत की कहानियां इन हिंदी। andthens


     इंसान और भूत की कहानी

Moral stories in hindi - बहुत समय पहले झंझारपुर गांव में राजू नाम का किसान रहता था। राजू अपने काम के प्रति बहुत ही मेहनती किसान था। हर दिन सुबह उठकर खेतों में काम करने के लिए चला जाता था। लेकिन हर दिन जंगल के रास्ते होकर जाना पड़ता था। राजू शाम ढलने से पहले घर चला आता था। 

moral stories in hindi short
Moral stories in Hindi


Moral stories in Hindi

    एक दिन राजू खेत से काम करके घर आ रहा था। अचानक एक दोस्त मिल गया। उनसे बातें करने लगे बातें करते-करते काफी देर हो गया और शाम भी होता जा रहा था। राजू दोस्त से जाने की विदा ली और चलने लगा। राजू जंगल के उस पार घर जाना था तो उन्होंने सोचा अगर सीधे रास्ते से गया तो रात हो सकती है। इसलिए हमें जंगल के रास्ते से जाना है। अगर जंगल के रास्ते से घर गया तो हम घर जल्दी पहुंच जायेंगे। इतना कह कर राजू चलने लगा। राजू जंगल के रास्ते बहुत मस्ती से चल था।

   तभी एक भूत के नजर चलते हुए राजू पर पड़ा। भूत देखने में बहुत डरावना था। भूत मन ही मन कहने लगा। वाह इंसान बहुत दिनों के बाद कोई इंसान मिला है। आज इस इंसान को खाने में बहुत ही मजा आ जाएगा भूत (moral) ऐसा कह कर राजू का पीछा करने लगा।

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भूत से अनजान राजू मस्ती से चल रहा था। तभी राजू के सामने भूत की डरावनी सी परछाई दिखी। राजू समझ गया उसके पीछे कोई भूत है। राजू डर के मारे पसीने छूटने लगे।
राजू बोला- यह भूत कहां से आ गया! मैं तो घर जल्दी पहुंचना चाहता था। लेकिन मैं कभी घर नहीं पहुंच पाउंगा।

तभी राजू डर के मारे एक तरकीब सोची और भूत की तरफ मोडा! भूत हंस रहा था कि आज हमें इंसान खाने को मिला है।
राजू बोला- क्या हुआ तुम हंस क्यों रहे हो।
भूत बोला- क्या मुझसे तुम्हें डर नहीं लग रहा है!राजू बोला- भला तुम से क्या डरना! 

भूत बोला- क्योंकि मैं भूत हूं।
राजू बोला- तो तुम भूत हो! मैं भी तो भूत हूं। भूत बोला- पर तुम भूत लगते तो नहीं हो। 

राजू बोला- मुझे ऐसे भूतों की तरह रहना अच्छा नहीं लगता है। इसलिए मैं इंसानों की तरह रहता हूं।

यह सुनकर भूत बहुत निराश हुआ। 
भूत बोला- अच्छा तुम भी भूत हो! मतलब मुझे आज भी इंसान खाने को नहीं मिलेगा।


राजू बोला- अरे इंसान खाना है तो मेरे साथ चलो।मैंने सुना है कि जंगल के उस रास्ते बहुत सारे इंसान जा रहा है। हम भी वही जा रहे हैं। चलो अब हम दोनों मिलकर खाएंगे।

भूत बोला- अच्छा ऐसा है तो चलो! 
भूत और राजू दोनों वहां से चल दिए। कुछ ही देर में आपस में दोनों बातें करते-करते दोस्ती हो गया।लेकिन फिर भी राजू को डर लगने लगा। राजू जानता था कि भूत से जल्द से जल्द छुटकारा पाना है। क्योंकि अगर भूत को सच पता चल गया तो भूत हमें खा जाएगा।

    तभी राजू एक तरकीब सोचा-
राजू बोला- तुम तो दोस्ती इतनी शक्तिशाली हो। तुम्हें तो किसी से डर नहीं लगता है। 
भूत बोला- नहीं नहीं मेरे दोस्त,मुझे भी डर लगता है! 

राजू बोला- किससे 
भूत बोला- मुझे पानी से डर लगता है। क्योंकि मैं पानी से बहुत डरता हूं। 
राजू समझ गया। फिर राजू भूत के साथ आगे बढ़ने लगा। जंगल के अंतिम छोर पर एक तालाब मिला।राजू समझ गया! भूत से छुटकारा पाने के लिए यही रास्ता है।

राजू बोला- दोस्त वो सारे इंसान तलाब के उस पार से जा रहा है। आओ हम दोनों मिलकर इस तालाब को पार करते हैं। 

भूत बोला- नहीं नहीं मेरे दोस्त! मैंने बताया था न कि मुझे पानी से बहुत डर लगता है। 
राजू बोला- कोई बात नहीं दोस्त! मैं तलाब उसके उस पर जाता हूं। उस सारे इंसान को पकड़ कर लाता हूं। तुम मेरा यही इंतजार करो।
भूत बोला- ठीक है! मेरे दोस्त लेकिन तुम जल्दी आना। 

राजू बोला- हम जल्दी आते हैं। 
इतना कह कर राजू तालाब में कूद गया और तलाब के उस पार हो गया। तलाब के उस पार जाने के बाद राजू चैन की सांस ली। 
फिर राजू जोर से बोला- अरे ओ भूत! तुम तो अब इंसान खाना भूल ही जाओ। 
भूत बोला- क्या हुआ दोस्त 
राजू बोला- अरे ओ भूत! मैं भी इंसान हूं। मैं तुम्हें उल्लू बना दिया।
 इतना कह कर राजू घर की ओर चल दिए।

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         ( समाप्त )


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